किताबबाज़ी - किताबें प्रेम कहानियों की

13th February 2022
Booknerds Team

प्रेम तो हर दौर में प्रासंगिक है क्योंकि प्रेम शाश्वत है । अलग अलग कालखंडों में बहुत से लेखकों ने प्रेम कहानियां लिखीं जो युगों के बीतने पर भी प्रेम की परिभाषाओं में सटीक बैठती हैं । 1958 में मोहन राकेश की लिखी आषाढ़ का एक दिन नाटक प्रकाशित हुआ । चौथी या पांचवी शताब्दी के पृष्ठभूमि पर रचा गया यह नाटक कालिदास और मल्लिका के प्रेम और विरह की कहानी है ।

म में डूबी मल्लिका कालिदास को महान बनता हुआ देखना चाहती है और उसके बदले वह पाती है विरह की त्रासदी । जब अंत में कालिदास कहते हैं - समय अधिक शक्तिशाली है क्योंकि वह प्रतीक्षा नहीं करता । पाठक की आंखें भींग जाती हैं । 1914 के आस पास प्रथम विश्व युद्ध के समय पर लिखी चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी 'उसने कहा था' प्रेम कहानियों  में सबसे पहले याद आती है । लहना सिंह जब अंतिम सांसे लेता है तो प्रेम का वह रूप साकार कर देता है जिसमें कोई अपेक्षा नहीं बस निःस्वार्थ प्रेम है । मनोहर श्याम जोशी की कसप जो कुमाऊंनी भाषा की सोंधी महक लिए है । डीडी और बेबी की  प्रेम कहानी जहाँ प्रेम और  अपने भविष्य के बीच द्वंद्व है । परंतु प्रेम कहाँ कमज़ोर पड़ता है , कभी कभी भविष्य को नयी दिशा भी देता है ।

कहूं तो 1949 में प्रकाशित 'गुनाहों का देवता ' जो प्रेम कहानियों में मील का पत्थर है । सुधा और चंदर जो आदर्श प्रेम की एक मिसाल बन गये । प्रेम दुःख और त्रासदी लेकर आता तो है पर प्रेम आपको मनुष्य भी बनाता है । कभी कभी सोचती हूं कि डेटिंग एप्स के मायाजाल में फंसी हमारी पीढ़ी क्या कभी इस प्रेम को समझ पाएगी ? अभिलेख की किताब फ़रेब का सफर इन्हीं संबंधों पर बात करती है । हमनें प्रेम कहानियों के कई आयामों पर कल क्लबहाऊस बात की । हमारे साथ 'द मॉर्डन पोएट्स' के सह संस्थापक मोहित द्विवेदी और लेखक अभिलेख द्विवेदी भी जुड़े थे । अगर आप हमसे नहीं जुड़ पाए तो लिंक बायो में है ।

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