बौद्ध दर्शन में निर्वाण का स्वरूप: एक मूल्यांकन - डॉ. अनामिका गुप्ता

5th April 2022

पुस्तक समीक्षा । बौद्ध दर्शन में निर्वाण का स्वरूप: एक मूल्यांकन
लेखिका - डॉ. अनामिका गुप्ता
प्रकाशक - नोशन प्रेस

"प्रतीक्षा करने वालों के लिए रात लंबी होती है। क्लान्त पथिक के लिए मार्ग लंबा होता है जो सत्य के प्रकाश को नहीं देखता ,उसके लिए बारंबार जन्म मरण की श्रृंखला की पीड़ा बहुत लंबी होती है ।"

लेखिका अनामिका गुप्ता की पुस्तक 'बौद्ध दर्शन में निर्वाण का स्वरूप: एक मूल्यांकन' बौद्ध धर्म में निर्वाण के विभिन्न स्वरूपों , सिद्धांतों व अवधारणाओं की विवेचना करती है। लेखिका ने स्वयं विभिन्न देशों की यात्रा की है और इन यात्राओं के दौरान उन्होंने  बौद्ध धर्म को काफी करीब से समझा । अपने अनुभवों को इस पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया है। बौद्ध दर्शन स्वयं में एक व्यापक विषय है। इस कितने ही मत और विचार हैं । यह किताब बौद्ध दर्शन में निर्वाण के विभिन्न स्वरूपों का मूल्यांकन करता है। निर्वाण अर्थात मोक्ष । इस विषय पर मत भिन्नता है । बौद्ध धर्म में मोक्ष का अर्थ है राग, द्वेष और मोह का त्याग । किताब में इस विषय के विभिन्न पक्षों का काफी विस्तृत वर्णन है। छह अध्यायों में विभाजित यह किताब बुद्ध के प्रमुख सिद्धांतों, उसकी अवधारणा, विभिन्न स्वरूपों की बात करती है। साथ ही निर्वाण प्राप्ति के विभिन्न मार्गों का भी विवरण देती है। पहले अध्याय में बुद्ध के प्रारंभिक जीवन, अभिनिष्क्रमण, धर्म चक्र प्रवर्तन पर चर्चा की गई है।

अगले अध्याय में बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धांतों की बात की गई है । आगे के अध्यायों में बौद्ध दर्शन के स्वरुप, विकास, नियम व प्रचार प्रसार को विस्तृत रूप में समझाया गया है। साथ ही भारतीय दर्शन में निर्वाण के विभिन्न स्वरूपों जैसे जैन, सांख्य, वैष्णव की भी चर्चा इस पुस्तक में मिलती है । 

अपने व्यापक विषय वस्तु और उचित तथ्यों के कारण यह किताब बौद्ध दर्शन पर लिखी कुछ चुनिंदा किताबों में से एक है । बौद्ध दर्शन के सिद्धांतों को सही ढंग से समझाने के उद्देश्य से विभिन्न स्रोतों का सहारा लिया गया है । जिससे किताब के विषय की प्रमाणिकता को बल मिलता है। बौद्ध दर्शन के विषय को काफी विस्तार से समझाने की कोशिश की गई है। हर बिंदु को पूरी प्रमाणिकता के साथ बताया गया है।

'इस संसार में हमारा मनुष्य जीवन एक अनजाने देश की यात्रा है। जिसकी अवधि को एक  यथार्थ ज्ञानी पुरूष कभी भी अधिक लंबा नहीं करना चाहेगा। बुद्ध मनुष्य को आंतरिक द्वंद्व से निकालने का मार्ग दर्शाते हैं ।'
बुद्ध के उपदेशों का लक्ष्य दुख से छुटकारा पाना है। यही मुक्ति निर्वाण का राह प्रशस्त करती है। 

किताब के कवर पृष्ठ पर छपी बुद्ध की तस्वीर जो ध्यान मग्न है इसके शीर्षक और विषय के साथ पूरी तरह न्याय करती है ।
इस पुस्तक में बौद्ध दर्शन की काफी सूक्ष्म विवेचना की गयी है । यह किताब यह समझाने में सफल है कि क्यों बौद्ध दर्शन को सर्वोच्च माना जाता है ? गौतम बुद्ध  साधन संपन्न होने के बावजूद क्यों सांसारिक मोह से विमुख हो गए? इन तमाम प्रश्नों का उत्तर इस किताब में है । बौद्ध दर्शन को करीब से और विस्तार से समझाती यह पुस्तक पाठकों के लिए ज्ञानवर्द्धक है ।  क्लिष्ट भाषा का प्रयोग आम पाठकों की रूचि कम करता है और विषय वस्तु बेहतरीन होने के बावजूद किताब कहीं कहीं नीरस लगने लगती है । 

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