पुस्तक समीक्षा: साँची पाती - वीना कपूर

24th May 2021

पुस्तक समीक्षा | साँची पाती | वीना कपूर

किताब: साँची पाती
लेखक: वीना कपूर

कथासार
इस धरती पर समाज में पुत्र तथा पुत्री परिवार के मुख्य अंग होते है। पुत्र के रूप में जन्म देकर माता पिता दोनों ही उससे कुटुम्ब की मान मर्यादा प्रतिष्ठा और वैभव की समस्त आशाएं अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखते है। दूसरी तरफ पुत्र के लिये भी माता पिता के प्रति कर्तव्य तथा सामाजिकता का संचालन उसके जीवन का आवश्यक अंग होता है। जहाँ पर उसको अतीत की पृष्ठभूमि पर वर्तमान का बीज रोपित करके भविष्य का वृक्ष खड़ा करना होता है। जीवन में तरह तरह के आकर्षण, उसको युवा अवस्था की कमजोरियों के कारण भटकाव की तरफ ले जाते है।

शैलेन्द्र इसी मानसिकता को लेकर जीवन में आगे बढ़ता है। बारह वर्ष की उम्र में उसका सामना प्रथम बार एक लड़की चित्रा से होता है। सोलह वर्ष की नाजुक उम्र में उसके जीवन में सुधा आती है। उसके बाद वह सीमा से टकराता है। और बाईसवें साल में वह प्रिया से मिलता है। प्रिया काल के कलाप में अन्नत में विलीन हो जाती है और उसका साथ छोड़ जाती है और अन्त में इस सागर को मीता जैसी गंगा मिलती है। मन, शरीर, कर्म और सामाजिक व्यवस्था के सामंजस्य को निभाते हुये शैलेन्द्र तथा मीता का मिलन कैसे होता है।

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